AC module सोलर सिस्टम और on grid सोलर सिस्टम में क्या अंतर है ?

आजकल लोग बहुत कंफ्यूज हैं AC module सोलर सिस्टम को लेकर की उन्हें क्यूँ AC module सोलर सिस्टम खरीदना चाहिए, किसी को भी इसके फायदे के बारे में क्लियर पता नहीं हैं।  

क्या यह पुराने ग्रिड कनेक्टेड सोलर सिस्टम से बेहतर है ? 

इसका जवाब है हाँ  AC module सोलर सिस्टम पुराने ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम से काफी अच्छे हैं।  

यह तकनीक कुछ ही सालो पहले आई है लेकिन सोलर उधोग के नेताओ ने इस उत्पाद को उपयोगिता पैमाने की पपरियोजनाओं में पेश किया, जहाँ सोलर स्थापना की आकार दस किलोवाट (10kw ) से शुरू होती है। 

सोलर उधोग को मोटे तौर पर दो खंडो में विभाजित किया जा सकता है:

1. रूफटोप सोलर ( रेजिडेंशियल, कमर्शियल, और इंडस्ट्रियल )
2. यूटिलिटी सोलर ( सोलर पार्क )

2019 के बाद से यूटिलिटी सेगमेंट बहुत तेजी से बढ़ रही  है कई EPC लीडिंग सोलर कंपनियां भी इस पर काम कर रही है भारत सरकार भी इसके विकास के लिए कई योजनाओं का प्रचार और सुभआरम्भ कर रही है। 

खैर छोडिये अब इन सब बातो को और चलिए अब हम अपनी टॉपिक की तरफ बढ़ते हैं, तो आज का हमारा टॉपिक है। 

ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम और Ac Module सोलर सिस्टम में क्या अंतर है ?

बेसिकली आज मैं आप लोगो को पांच ऐसे कारण बताने वाला हूँ जो Ac Module सोलर सिस्टम को On Grid सोलर सिस्टम से बेहतर बनाते हैं।  




Ac Module सोलर सिस्टम की पांच खूबियों को जानने से पहले चलिए एकबार संछिप्त में  जान लेते हैं  की  Ac Module सोलर सिस्टम क्या है? । 

Ac Module सोलर सिस्टम में सोलर पैनल में ही एक छोटी सी इन्वर्टर लगी रहती है जिसे माइक्रो इन्वर्टर कहा जाता है। 

माइक्रो इन्वर्टर पर हमने पहले भी चर्चा की है अधिक जानकारी के लिए आप यहाँ क्लिक करके माइक्रो इन्वर्टर के बारे में पढ़ सकते हैं, सोलर पैनल के अन्दर ही माइक्रो इन्वर्टर लगे रहने के कारण हमें डायरेक्ट सोलर पैनल से ही Ac करंट मिल जाती है इसलिए हम इसे Ac Module सोलर सिस्टम कहते हैं। 

चलिए अब जानते हैं AC मोडल सोलर सिस्टम की वो पांच खूबियाँ जो इसे ON ग्रिड सोलर सिस्टम से बेहतर बनाते हैं .



1. नेटमीटरिंग  प्रावधान:


एक पुरानी ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम तब तक चालु नहीं होगी जब तक की बिजली विभाग द्वारा पूरी तरह से मंजूरी नहीं मिल जाती हालाँकि अब भारत के लगभग सभी राज्यों में नेटमीटरिंग का प्रावधान लागू होने लगा है। 

पर फिर भी इसकी मंजूरी मिलने में काफी समय लगता है, इसके विपरीत एक Ac Module को ऐसे किसी भी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती है बल्कि एक बार Ac Module सोलर सिस्टम स्थापित करते ही सिर्फ तिन दिनों के अन्दर ही ग्राहक अपने घर के सभी उपकरणों को सोलर पॉवर पर चलाने में सक्षम होते हैं। 


Note: अगर आपको नेट मीटरिंग के बारे में ज्यादा नहीं समझ में आया है तो आप पहले ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम के बारे में पढ़िए जिसके बारे में पहले से ही एक पोस्ट लिखी गयी है। 




2.परछाई का प्रभाव:


अगर किसी ग्राहक ने एक 3 किलोवाट का पुराना ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम लगवाया है तो उसके छत पर टोटल 9 सोलर पैनल लगेंगे।  

अब अगर किसी भी कारन से किसी एक सोलर पैनल पर थोड़ी सी परछाई पड़ने लगती है ये परछाई किसी भी चीज़ का हो सकता है। 

जैसे की ( छत पर रखी पानी का टैंक, किसी चीज़ का पेड़, या डिश टीवी ऐन्टेना इत्यादि. ) तब उस सोलर की 40% एफिसिएंसी ख़तम हो जाती है और ये सिर्फ एक सोलर पैनल की बात नहीं है जो परछाई के अन्दर आ गई है बल्कि इसके साथ साथ बाकी के बचे  8 सोलर पैनल की भी एफिसिएंसी 40% कम हो जाती है जो उनके साथ लगी होती है।

अब अगर वहीँ हम बात करें AC module सोलर पैनल की तो इसमें सिर्फ उसी पैनल की एफिसिएंसी कम होती है जो पैनल परछाई के चपेट में आ जाती है बाकी सभी पैनल पुरे 100% एफिसिएंसी के साथ काम करते हैं. इसका कारन यह है की Ac Module सोलर पेनल्स एकदुसरे के बिना ही अपना काम करते हैं क्यूंकि उन सभी पेनल्स में एक-एक माइक्इरो न्वर्टर लगा रहता है। 




3. पैनल लेवल परफोर्मिंग मोनिटरिंग:





यदि कोई ग्राहक अपने घर में 3किलोवाट ( 9 पैनल  ) या,  5किलोवाट ( 15 पैनल ) ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम लगवाता है और अगर किसी करणवश उन पैनलो में से किसी एक पैनल में खराबी आ जाती है। 

और वह पैनल पॉवर देना बंद कर देती है तो पुराने ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम में इसे पता लगाना काफी मुश्किल होता है इसके ग्राहक को सोलर इंजिनीअर को बुलाना पड़ेगा जो एक-एक करके सभी सोलर पैनल को चेक करेगा 

फिर जिसमे खराबी होगी उसे ठीक करेगा या उसके किसी पुराने पार्ट को बदल देगा. लेकिन वहीँ Ac Module सोलर सिस्टम में कंज्यूमर खुद ही ये पता लगा सकता है की कौन सा पैनल खराब हुआ है वो भी बिना पैनल के पास गए रिमोटली वह इस चीज़ का पता लगा सकता है वो भी अपने मोबाइल, लैपटॉप, या PC की मदद से 



4. आगे चलकर थोडा बढाने की सोच:


पुराने ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम को भविष्य में बढाने की गुंजाइश बिलकुल भी नहीं है, उदहारण के लिए एक 2 किलोवाट सोलर सिस्टम का मूल्य एक लाख बीस हज़ार (120,000 ) है, जो की एक बहुत बड़ा अमाउंट है। 

अब अगर कोई ग्राहक भविष्य में इसे अपग्रेड करने की सोच रहा है तो यह काफी घाटे का सौदा हो सकता है क्यूंकि ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम में सभी घटक एकदुसरे से जुड़े होते हैं और वें एकदूसरे पर निर्भर होते हैं। 

अगर आप इन्हें अपग्रेड करना चाहते हैं तो आपको पूरा का पूरा सिस्टम ही हटाना पर सकता है जैसे की: सोलर पैनल, माउनटिंग स्ट्रक्चर, MCB, इन्वर्टर, वायर्स एंड केबल्स इत्यादि। 

सभी को बदलना पर सकता है, वही दूसरी ओर  अगर हम Ac Module सोलर सिस्टम को अपग्रेड करना चाहें तो हमें सिर्फ उसमे और पेनल्स को जोड़ते जाना है बस इतना ही, इसमें हमें किसी भी पुराने चीजों को बदलना नहीं पड़ता है। 



5. सेफ्टी लेवल:


अगर आप के छत पर पुराने टाइप की ऑन ग्रिड सोलर सिस्टम लगी है तो आप इस बात का हमेशा ध्यान रखें की उसमे से हमेशा हाई वोल्टेज DC करंट बहती रहती है जो किसी को भी नुक्सान पहुंचा सकती है। 

अगर आप के घर में ग्रिड की लाइन नहीं है तब भी सोलर पैनल से निकले वायरो में 600वोल्ट DC करंट बहती रहती है. जबकि AC मोडूल सोलर सिस्टम में ऐसा नहीं होता उसमे केवल 220volt AC पॉवर की सप्लाई रहती है वो भी तब तक जब तक की ग्रिड की लाइन घर में आ रही होती है, जैसे ही ग्रिड की लाइन कट जाती है वैसे ही इनके वायरो में करंट आना बंद हो जाता है। 

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