इससे पहले की मैं आपको ये बताऊँ की माइक्रो इन्वर्टर क्या होता है, चलिए एक बार जान लेते हैं की इन्वर्टर क्या होता है और इन्वर्टर का काम क्या होता है?
इन्वर्टर और इसका उपयोग: इन्वर्टर एक ऐसी डिवाइस होती है जिसका इस्तेमाल DC पावर सप्लाई को AC पावर बनाने में किया जाता है
इस बढ़ते हुए टेक्नोलॉजी के युग में दिन पर दिन नई-नई टेक्नोलॉजी से लैस डिवाइसेस देखने को मिल रहें हैं और जिस प्रकार से नए-नए टेक्नोलॉजी का आगाज़ हो रहा है धीरे धीरे करके हर एक चीज़ की साइज छोटी होती जा रही है जैसे की: पहले के ज़माने में टेलीफोन हुआ करती थी जिसकी साइज भी बड़ी थी और उसमे वायर भी कनेक्ट करना पड़ता था और अब देखिये हमारे हाथो में कितना छोटा मोबाइल फ़ोन है जिससे हज़ारो काम किये जा रहें हैं जबकि टेलीफोन से सिर्फ वाइस् कॉल ही कर सकते थे, चलिए एक और एक्जाम्पल लेते हैं कंप्यूटर का, शुरू-शुरू में जिस कंप्यूटर का इन्वेंशन हुआ था वो कंप्यूटर इतनी बड़ी थी की एक पुरे रूम में एक ही कंप्यूटर को इनस्टॉल किया जाता था लेकिन जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ी कंप्यूटर की साइज छोटी होती गई और आज देखिये कंप्यूटर इतनी छोटी हो चुकी है जिसे हम आसानी से एक बैग में डाल कर कहीं भी ले जा सकते हैं।
अब कहीं आप ये सोच रहें होंगे की मैं आपको ये सब क्यों बता रहा हूँ ? तो दोस्तों मैं आपको ये सब इसलिए बता रहा हूँ क्यूंकि जिस तरह से आपने ऊपर के दो एक्जाम्पल में देखा की किस तरह से रोज़ाना एक नई-नई टेक्नोलॉजी का आगाज़ हो रहा है और चीज़े दिन पर छोटी होती जा रही है ठीक उसी प्रकार से माइक्रो इन्वर्टर का भी आगाज़ हुआ है। जैसा की माइक्रो का मतलब ही होता है नार्मल साइज से छोटा और नैनो टेक्नोलॉजी माइक्रो टेक्नोलॉजी से भी छोटी होती है।
अब कहीं आप ये सोच रहें होंगे की मैं आपको ये सब क्यों बता रहा हूँ ? तो दोस्तों मैं आपको ये सब इसलिए बता रहा हूँ क्यूंकि जिस तरह से आपने ऊपर के दो एक्जाम्पल में देखा की किस तरह से रोज़ाना एक नई-नई टेक्नोलॉजी का आगाज़ हो रहा है और चीज़े दिन पर छोटी होती जा रही है ठीक उसी प्रकार से माइक्रो इन्वर्टर का भी आगाज़ हुआ है। जैसा की माइक्रो का मतलब ही होता है नार्मल साइज से छोटा और नैनो टेक्नोलॉजी माइक्रो टेक्नोलॉजी से भी छोटी होती है।
अब तक आप ये तो समझ ही गए होंगे की माइक्रो इन्वर्टर एक छोटी सी इन्वर्टर होती है जो नार्मल इन्वर्टर से काफी छोटी होती है। अब बात करते हैं माइक्रो इन्वर्टर के उपयोग की और इसके दूसरे डिटेल्स के बारे में
माइक्रो इन्वर्टर का उपयोग: दोस्तों माइक्रो इन्वर्टर का उपयोग सोलर पैनल में किया जाता है, हाँ अगर आप चाहें तो इसका उपयोग बैटरी के साथ भी कर सकते हैं, लेकिन माइक्रो इन्वर्टर को अधिकांस सोलर पैनल में ही यूज़ किया जाता है, जैसा की आप निचे के इमेज में देख सकते हैं।
माइक्रो इन्वर्टर के फायदे :
1. माइक्रो इन्वर्टर का पहला जो सबसे बड़ा फायदा है वो यह है की इसमें जितने भी सोलर पैनल होते हैं सबमें एक इन्वर्टर लगी होती है जिसके कारन होता ये है की अगर किसी एक पैनल की इन्वर्टर में कोई दिक्कत आती है तो उसके कारन सोलर की पॉवर सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आती है सिर्फ उस एक सोलर पैनल से सप्लाई नहीं आती जिसकी इन्वर्टर में कोई प्रॉब्लम होता है लेकिन अगर यहीं पे सभी सोलर पैनल के लिए सिर्फ एक इन्वर्टर लगी होती और उसमे कोई छोटा सा भी प्रॉब्लम आ जाता तो पूरी की पूरी सप्लाई ही बंद पर जाती
2. इसमें दूसरी जो सबसे अच्छी बात है वो ये है की इसे रखने के लिए आपको किसी जगह के लिए कोई टेंसन नहीं होती है क्यूंकि ये इन्वर्टर इतने छोटे होते हैं की इन्हें सोलर पैनल के अन्दर ही आराम से फिट कर दिया जाता है
माइक्रो इन्वर्टर के नुक्सान:
1. माइक्रो इन्वर्टर का रेट काफी ज्यादा होता है,और छत के ऊपर लगे रहने के कारण इन्हें मेंटेनेंस करना या बदल कर नया (दूसरा) इन्वर्टर लगाना थोडा सा मुश्किल होता है
माइक्रो इन्वर्टर के फायदे :
1. माइक्रो इन्वर्टर का पहला जो सबसे बड़ा फायदा है वो यह है की इसमें जितने भी सोलर पैनल होते हैं सबमें एक इन्वर्टर लगी होती है जिसके कारन होता ये है की अगर किसी एक पैनल की इन्वर्टर में कोई दिक्कत आती है तो उसके कारन सोलर की पॉवर सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आती है सिर्फ उस एक सोलर पैनल से सप्लाई नहीं आती जिसकी इन्वर्टर में कोई प्रॉब्लम होता है लेकिन अगर यहीं पे सभी सोलर पैनल के लिए सिर्फ एक इन्वर्टर लगी होती और उसमे कोई छोटा सा भी प्रॉब्लम आ जाता तो पूरी की पूरी सप्लाई ही बंद पर जाती
2. इसमें दूसरी जो सबसे अच्छी बात है वो ये है की इसे रखने के लिए आपको किसी जगह के लिए कोई टेंसन नहीं होती है क्यूंकि ये इन्वर्टर इतने छोटे होते हैं की इन्हें सोलर पैनल के अन्दर ही आराम से फिट कर दिया जाता है
माइक्रो इन्वर्टर के नुक्सान:
1. माइक्रो इन्वर्टर का रेट काफी ज्यादा होता है,और छत के ऊपर लगे रहने के कारण इन्हें मेंटेनेंस करना या बदल कर नया (दूसरा) इन्वर्टर लगाना थोडा सा मुश्किल होता है
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