अर्थ और न्यूट्रल में क्या अंतर है ?
ये सवाल बहुत से इलेक्ट्रीशियन के मन में बार बार आता रहता है की आखिर क्या अंतर है न्यूट्रल और अर्थ में, जो न्यूट्रल पोल पर होती है वो कहाँ से बन कर आती है, क्या जिस प्रकार अर्थ को बनाया जाता है उसी प्रकार न्यूट्रल को भी बनाया जाता है,?
तो दोस्तों आज के इस पोस्ट में, मैं आप लोगो के इन्ही कुछ सवालो के जवाब बहुत ही अच्छे तरीके से देनेवाला हूँ। इसके लिए आपको इस पोस्ट को पूरा अंत तक पढ़ना होगा और पुरे ध्यान से पढ़ना होगा।
तो चलिए शुरुआत करते हैं।
अर्थिंग - (earthing) का उपयोग: अर्थ जो होती है वो किसी भी विधुतीय उपकरण के बॉडी में लगाया जाता है, या सॉकेट के उपर वाले पिन में भी अर्थिंग का कनेक्शन किया जाता है, ये कनेक्शन इसलिए किया जाता है ताकि जब किसी उपकरण में फेज लीक कर रही हो तब उससे किसी इंसान को खतरा ना हो, दरअसल होता ये है की जब भी किसी उपकरण में फेज लीक होने लगती है यानि जब फेज किसी उपकरण के बॉडी में आने लगती है तब अर्थ उस फेज को अपने अंदर खिंच लेती है जिससे उपकरण की बॉडी में करंट आना बंद हो जाता है और किसी ह्यूमन बॉडी को कोई नुक्सान नहीं पहुँच पाता, यही मैन काम है अर्थिंग का
अर्थिंग - (earthing) की बनावट: अर्थिंग कैसे बनाया जाता है ये तो लगभग सभी लोग जानते हैं, अगर आप नहीं जानते हैं की अर्थिंग कैसे बनाया जाता है तो आप निचे दिए गए पोस्ट को पढ़कर सिख सकते हैं, खैर...! अभी हमारा जो सबसे मैन सवाल है की अर्थिंग आती कहा से है ? तो दोस्तों मैं आपको बता दूँ की अर्थिंग कही से नहीं आती है बल्कि इसे अपने घर में ही बनाया जाता है और इसे ज़मीन से निकला जाता है, कही पर भी हम अगर ज़मीन के 6फिट या 10फिट अंदर तक किसी मोठे गेज वाले ताम्बे के तार या लोहे के रोड को या अन्य किसी धातु को डालकर उसमे से जो कनेक्शन लेते हैं उसे अर्थिंग के रूप में यूज़ करते हैं।
अभी तक आपने अर्थिंग के बारे में बहुत अच्छी तरह जान लिया है, तो चलिए अब जान लेते हैं न्यूट्रल के बारे में।
न्यूट्रल - (neutral) का उपयोग: न्यूट्रल का उपयोग आप कुछ इस तरह से समझ सकते हैं की बिना न्यूट्रल के किसी भी इलेक्ट्रिकल सर्किट को पूरा ही नहीं किया जा सकता है, अगर आसान शब्दों में कहा जाये तो बिना न्यूट्रल के किसी भी इलेक्ट्रिकल उपकरणों को नहीं चलाया जा सकता, अब आपके मन में ये सवाल आएगा की हम अर्थिंग से भी तो किसी बल्ब को जला सकते हैं, तो आपका ये सोचना बिलकुल सही है लेकिन न्यूट्रल जो होती है वो AC करंट को रिटर्न करने का सबसे मैन पाथ है, क्यूंकि न्यूट्रल के साथ आप ज्यादा से ज्यादा लोड को भी जोड़ सकते हैं लेकिन अगर आप अर्थ के साथ किसी बड़ी लोड को देते हैं तो आप देखेंगे की अर्थ जल्दी ही ख़राब हो जाती है। उपयोग के मामले में तो ये दोनों लगभग एक सामान ही है। लेकिन बनावट की दृष्टिकोण से ये दोनों काफी अलग हैं। तो चलिए देखते हैं न्यूट्रल की बनावट
image-1 ट्रांसफार्मर के अंदर की स्टार डेल्टा कनेक्शन
न्यूट्रल - (neutral) की बनावट: दोस्तों अर्थिंग को तो हम अपने घर में ही बनाते हैं, लेकिन न्यूट्रल जो होती है वो हमारे एरिया के डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर से निकलकर आती है, अब सवाल ये है की ये न्यूट्रल बनती कैसे है ? तो दोस्तों निचे दिए गए इमेजेस में अगर आप गौर से देखेंगे तो आपको ये पता चलेगा की न्यूट्रल बनती कैसे है। दरअसल होता ये है की हमारे एरिया के बाहर एक थ्री फेज की स्टार डेल्टा वाली ट्रांसफार्मर लगी होती है जो की हमारे घरो में पावर डिस्ट्रीब्यूट करने का काम करती है, इस ट्रांसफार्मर के अंदर तीनो फेजों का इनपुट डेल्टा कनेक्शन के साथ किया जाता है। जैसा की आप image-2 में भी देख सकते हैं। इनपुट की जो कनेक्शन होती है वो ट्रांसफार्मर के प्राइमरी कोइल के साथ किया जाता है। अंदर से किसी ट्रांसफार्मर की स्टार और डेल्टा कनेक्शन कैसी होती है ये आप ऊपर वाले image-1 में भी देख सकते हैं।
अब जो ट्रांसफार्मर से आउटपुट निकलती है वो ट्रांसफार्मर के सेकेंडरी कोइल से स्टार कनेक्शन से निकलती है जिसे आप इमेज में भी देख सकते हैं। ये जो तीनो कोइलो का स्टार कनेक्शन होता है इसी के बिच वाले पॉइंट से न्यूट्रल को निकाला जाता है। निचे दिए गए image-2 में आप देखेंगे की एक लाल कलर का तीर स्टार कनेक्शन के बिच बिंदु की ओर इशारा कर रहा है जहाँ से न्यूट्रल निकल रही है।
आशा करते हैं की आपको ये पोस्ट अच्छा लगा होगा, अगर आपको ये पोस्ट अच्छा लगा हो तो हमें सपोर्ट करने के लिए फॉलो जरुर करें |
अगर आपका कोई सवाल या सुझाव है तो निचे कमेंट जरुर करें |




