What is DC current- दिष्ट धारा किसे कहते हैं?
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दोस्तो आज के इस पोस्ट में हम जानेंगे कि दिष्ट धारा किसे कहते हैं।
दिष्ट धारा यानी कि डीसी करंट इसे डायरेक्ट करंट भी कहा जाता है विधुत क्या होती है और यह कितने प्रकार की होती है आप यह पहले ही जान चुके हैं तो आपने यह भी देखा होगा कि विधुत के दो प्रकार होते हैं पहला स्थिर विधुत दूसरा चल विधुत यह जो डीसी करंट होती है यह चल विधुत का ही एक प्रकार है।
तो चलिए अब हम बताते हैं आपको पूरे विस्तार से कि डीसी करंट होती क्या है?
तो शुरुआत करते हैं इसके परिभाषा से
दिष्ट धारा यानी कि डीसी करंट इसे डायरेक्ट करंट भी कहा जाता है विधुत क्या होती है और यह कितने प्रकार की होती है आप यह पहले ही जान चुके हैं तो आपने यह भी देखा होगा कि विधुत के दो प्रकार होते हैं पहला स्थिर विधुत दूसरा चल विधुत यह जो डीसी करंट होती है यह चल विधुत का ही एक प्रकार है।
तो चलिए अब हम बताते हैं आपको पूरे विस्तार से कि डीसी करंट होती क्या है?
तो शुरुआत करते हैं इसके परिभाषा से

परिभाषा: वैसा विधुत धारा जिसके समय के साथ-साथ मान में परिवर्तन होती रहती है और दिशा एक समान रहती है यानी की दिशा में कोई परिवर्तन नहीं होती है तो इसे हम दिष्ट धारा कहते हैं।
अर्थ: जैसा की परिभाषा में ही लिखा हुआ है कि वैसा विधुत धारा जिसके सिर्फ मान में ही परिवर्तन होती है और दिशा एक समान रहती है यानी कि यह जो विधुत धारा है यह जब चलती है तो सीधी चलती है क्योंकि इसके दिशा में कोई परिवर्तन नहीं हो रही है तो जाहिर सी बात है यह सीधी ही चलेगी और इसके सिर्फ मान में ही परिवर्तन हो रही है। आप नीचे दी गई तस्वीर में भी देख सकते हैं कि किस तरह से डीसी करंट चलती है।
अब सवाल ये आता है कि आम जिंदगी में हम डीसी करंट को कैसे पहचानेंगे.? तो यह बहुत ही आसान है सबसे पहले हम यह देखेंगे कि सप्लाई का सोच क्या है जैसे जैसे की सप्लाई कहां से आ रही है हो सकता है सप्लाई बैटरी से आ रही होगी अगर सप्लाई बैटरी से आ रही है तो यह डीसी करंट है अगर सप्लाई किसी जनरेटर से आ रही है तो भी यह डीसी करंट है अगर जनरेटर में स्लिप रिंग लगाया हुआ है तो वह डीसी को ही एसी बनाती है और अगर सप्लाई अल्टरनेटर से है या किसी ट्रांसफार्मर से है तो वह ऐसी करंट होगी
अगर आप अभी तक यह नहीं जानते कि एसी करंट क्या होती है तो यहां क्लिक कर के देख सकते हैं।
डीसी करंट के बारे में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण बातें जो आपको याद रखनी चाहिए।
* इसका अधिकतम उत्पादन 650 वोल्ट तक होता है।
* इसका न्यूनतम उपयोग 1.33 वोल्ट से 1.5 वोल्ट तक होता है।
* इसकी कोई आवृत्ति (frequency) नहीं होती है।
* इसका खोज वोल्टा नामक वैज्ञानिक ने सन 1800 में किया था।
* दिष्ट धारा मापने के लिए हीड्रोमेटेर का प्रयोग किया जाता है, इसके अलावा अन्य मल्टीमीटर से भी इसे मापा जा सकता है
दिष्ट धारा के श्रोत:
1. बैटरी
2. डी सी जनरेटर
3. सोलर पैनल
4. थर्मोकॉप्ल्स
5. डी सी पावर कनवर्टर जो ए सी करंट को डी सी में बदल देते हैं जैसे: मोबाइल चार्जर, लैपटॉप चार्जर ..... इत्यादि।
डी सी करंट के - फायदे:
* यह लगभग सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग किया जाता है।
* इससे कभी भी झटके लग कर जान जाने का खतरा नहीं होता है।
* डी सी पावर का उपयोग करना काफी आसान होता है।
डी सी करंट के - नुकसान:
* इसे बहुत ज्यादा दूर तक नहीं ले जाया जा सकता है।
* डी सी के हाई पावर सप्लाई सिस्टम को बैठाने के लिए खर्च भी बहुत ज्यादा हो जाता है।
* डी सी पावर बहुत सिमित होती है


