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आज हम जानेंगे की वोल्टेज किसे कहते हैं इसकी पूरी परिभाषा के थ्योरी को जानेंगे और साथ ही साथ प्रैक्टिकली भी हम ये जानेंगे की वोल्टेज किसे कहते हैं, तो चलिए देखते हैं....!
थ्योरी परिभाषा :
जब किसी चालक में से विधुतधारा प्रवाहित की जाती है तो उसके सिरों के बिच कुछ अंतर पैदा हो जाता है जिसे विभवांतर कहते हैं इन अन्तरो के मान को ही वोल्टेज कहा जाता है,
चलिए इसे ज़रा और भी विस्तार से समझते हैं,
जैसा की ऊपर लिखा है: """जब किसी चालक में से विधुतधारा प्रवाहित की जाती है""" हमें यहाँ पर सबसे पहले ये समझना या जानना होगा की चालक किसे कहते हैं ? और विधुतधारा क्या होती है ? और फिर प्रवाहित करना या प्रवाहित होना क्या होता है ?
अगर कम शब्दों में कहा जाए तो;
चालक- यानि की कोई भी ऐसा पदार्थ जिसमे से विधुत यानि बिजली को आसानी से गुजारा जा सकता है, जैसे की : लोहा, टीना, ताम्बा, चांदी, सोना,...... इत्यादि
और विधुतधारा- यानि की विधुत का बहाव जैसे की मोटर से निकलने वाली पानी किसी पाइप से बहते हुए जाती है उसी प्रकार विधुत का बहाव किसी चालक में से होता है, विधुत भी मोटर के पानी की तरह किसी चालक में से बहते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है,
अब प्रवाहित होना - निरंतर किसी चालक में से विधुत का बहना ही विधुत का प्रवाहित होना कहा जाता है
उसके बाद लिखा है: """तो उसके सिरों के बिच कुछ अंतर पैदा हो जाता है""" यहाँ पर उसके सिरों का मतलब है 'चालक का सिरा, अगर हम ये जान गए की चालक क्या है तो हमें ये भी पता चल जायेगा की उसके सिरे कैसी होती हैं , इसके बाद हमें ये समझना है की उन सिरों के बिच जो कुछ अंतर पैदा हो जाता है ये अंतर पैदा होना क्या है ?
अंतर पैदा होना - यहाँ पर अंतर पैदा होने का मतलब है वेग, प्रेसर, या दबाव
और उसके बाद जो लिखा है: ""जिसे विभवांतर कहते हैं "" विभवांतर का मतलब होता है वोल्टेज, voltage का हिंदी अर्थ होता है विभवांतर ,
इसके बाद जो लिखा है:""इन अन्तरो के मान को ही वोल्टेज कहा जाता है"" यानी की चालक के सिरों के बिच जो अंतर पैदा होता है उन अन्तरो के मान को ही (voltage) या विभवांतर कहा जाता है
इसका मतलब ये हुआ की उसमे मौजूद वेग या प्रेसर को ही मापा जाता है और उस माप का जो मान निकलकर आता है, उस मान को ही वोल्टेज कहा जाता है
चलिए इसे और अच्छे से समझते हैं एक छोटे से प्रैक्टिकल के माध्यम से
जैसा की हमने ऊपर पहले ही देख लिया है की जिस तरह मोटर से पानी निकल कर पाइप के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है ठीक उसी प्रकार करंट भी वायर के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है, और इन दोनों में सबसे कॉमन बात ये है की जिस तरह पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए बल या प्रेसर लगती है ठीक उसी प्रकार करंट को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए बल लगती है और ये जो बल है यही है वोल्टेज, वायर के अंदर करंट को चलाने वाला बल ही वोल्टेज है,
जैसा की आप इन इमेज में भी देख सकते हैं एक पाइप से निकलते हुए पानी के बहाव को, हो सकता है ये पानी किसी मोटर से आ रही होगी या हो सकता है किसी वाटर टैंक से आ रही होगी,
अगर ये पानी मोटर से आ रही होगी तो मोटर के अंदर से ही इतना प्रेसर आ रहा होगा जिससे पानी आगे की तरफ चल रही है, ठीक जिस प्रकार अल्टरनेटर से ऐसी सप्लाई निकलती है
अगर ये पानी किसी टैंक से आ रही होगी तो टैंक में मौजूद पानी के दबाव के कारन पानी को प्रेसर मिल रहा होगा और पानी आगे की तरफ चल रही है, ठीक जिस प्रकार बैटरी से डीसी सप्लाई निकलती है
तो कहने का मतलब बिलकुल साफ़ है वोल्टेज यानी करंट को चलाने वाला प्रेसर या बल ही है वोल्टेज
थ्योरी परिभाषा :
जब किसी चालक में से विधुतधारा प्रवाहित की जाती है तो उसके सिरों के बिच कुछ अंतर पैदा हो जाता है जिसे विभवांतर कहते हैं इन अन्तरो के मान को ही वोल्टेज कहा जाता है,
चलिए इसे ज़रा और भी विस्तार से समझते हैं,
जैसा की ऊपर लिखा है: """जब किसी चालक में से विधुतधारा प्रवाहित की जाती है""" हमें यहाँ पर सबसे पहले ये समझना या जानना होगा की चालक किसे कहते हैं ? और विधुतधारा क्या होती है ? और फिर प्रवाहित करना या प्रवाहित होना क्या होता है ?
अगर कम शब्दों में कहा जाए तो;
चालक- यानि की कोई भी ऐसा पदार्थ जिसमे से विधुत यानि बिजली को आसानी से गुजारा जा सकता है, जैसे की : लोहा, टीना, ताम्बा, चांदी, सोना,...... इत्यादि
और विधुतधारा- यानि की विधुत का बहाव जैसे की मोटर से निकलने वाली पानी किसी पाइप से बहते हुए जाती है उसी प्रकार विधुत का बहाव किसी चालक में से होता है, विधुत भी मोटर के पानी की तरह किसी चालक में से बहते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है,
अब प्रवाहित होना - निरंतर किसी चालक में से विधुत का बहना ही विधुत का प्रवाहित होना कहा जाता है
उसके बाद लिखा है: """तो उसके सिरों के बिच कुछ अंतर पैदा हो जाता है""" यहाँ पर उसके सिरों का मतलब है 'चालक का सिरा, अगर हम ये जान गए की चालक क्या है तो हमें ये भी पता चल जायेगा की उसके सिरे कैसी होती हैं , इसके बाद हमें ये समझना है की उन सिरों के बिच जो कुछ अंतर पैदा हो जाता है ये अंतर पैदा होना क्या है ?
अंतर पैदा होना - यहाँ पर अंतर पैदा होने का मतलब है वेग, प्रेसर, या दबाव
और उसके बाद जो लिखा है: ""जिसे विभवांतर कहते हैं "" विभवांतर का मतलब होता है वोल्टेज, voltage का हिंदी अर्थ होता है विभवांतर ,
इसके बाद जो लिखा है:""इन अन्तरो के मान को ही वोल्टेज कहा जाता है"" यानी की चालक के सिरों के बिच जो अंतर पैदा होता है उन अन्तरो के मान को ही (voltage) या विभवांतर कहा जाता है
इसका मतलब ये हुआ की उसमे मौजूद वेग या प्रेसर को ही मापा जाता है और उस माप का जो मान निकलकर आता है, उस मान को ही वोल्टेज कहा जाता है
चलिए इसे और अच्छे से समझते हैं एक छोटे से प्रैक्टिकल के माध्यम से
जैसा की हमने ऊपर पहले ही देख लिया है की जिस तरह मोटर से पानी निकल कर पाइप के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है ठीक उसी प्रकार करंट भी वायर के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती है, और इन दोनों में सबसे कॉमन बात ये है की जिस तरह पानी को एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए बल या प्रेसर लगती है ठीक उसी प्रकार करंट को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए बल लगती है और ये जो बल है यही है वोल्टेज, वायर के अंदर करंट को चलाने वाला बल ही वोल्टेज है,
अगर ये पानी मोटर से आ रही होगी तो मोटर के अंदर से ही इतना प्रेसर आ रहा होगा जिससे पानी आगे की तरफ चल रही है, ठीक जिस प्रकार अल्टरनेटर से ऐसी सप्लाई निकलती है
अगर ये पानी किसी टैंक से आ रही होगी तो टैंक में मौजूद पानी के दबाव के कारन पानी को प्रेसर मिल रहा होगा और पानी आगे की तरफ चल रही है, ठीक जिस प्रकार बैटरी से डीसी सप्लाई निकलती है
तो कहने का मतलब बिलकुल साफ़ है वोल्टेज यानी करंट को चलाने वाला प्रेसर या बल ही है वोल्टेज
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