घरो में कई प्रकार की वायरिंग प्रणालियाँ अपनाई जाती है, प्रत्येक प्रणाली के अलग अलग लाभ तथा हानियाँ होती हैं, इसलिए कोई भी एक प्रकार की वायरिंग सभी घरो के लिए फिट नहीं बैठती, निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुए किसी विशेष स्थापना के लिए उपयुक्त प्रणाली चुननी चाहिए :
(क ) वोल्टेज जिसके लिए वायरिंग करनी है
(ख ) मौसम
(ग) घर का आधार या स्थापना (installation) का आधार
विधुत एनर्जी तो इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी देती है जो सर्विस मैन के द्वारा घर में आती है, घर पर I.E. Rule Nos. 31 तथा 32 के अनुसार पोजेटिव पर फ्यूज कट-आउट और न्यूट्रल पर लिंक लगानी आवश्यक है/ इसके पश्चात मीटर लगता है, लेकिन आजकल मीटर पहले और फ्यूज बाद में लगता है/ आजकल के मीटर सप्लाई कम्पनी द्वारा सील किये होते हैं/ इसके बाद सप्लाई उपभोगता के कन्ट्रोल में हती है/ यहाँ उपभोगता का अपना डबल पोल मेन स्विच लगा होता है/ तथा कटआउट फ्यूज लोहे या लकड़ी के बोर्ड पर लगे रहते हैं |
वायरिंग प्रणालियाँ (wiring systems) :
(क) ट्री प्रणाली (Tree System)
(ख) डिस्ट्रीब्यूशन प्रणाली (Distribution System)
अब चलिए हम इन दोनों को अच्छे से समझते हैं ..!
(क) ट्री प्रणाली (tree system) - ट्री प्रणाली में ब्रांच सर्किट मेन लाइन के साथ स्थान-स्थान पर आवश्यकता अनुसार लूप किये जाते हैं/ इस प्रणाली में एक ही सर्किट होता है और उसी में जोड़ लगाकर सभी जगहों पे सर्किट को भेजा जाता है/ इस प्रणाली में जोड़ अधिक हो जाते हैं जिसके कारन अगर कही कुछ खराबी हो जाए तो उसे ढूँढना बहुत मुश्किल होता है/ इसलिए यह विधि अब ज्यादा नहीं अपनाई जाती है |
इसके लाभ और हानियाँ..!
*. लाभ (advantage) - इस तरह की वायरिंग करने में बहुत कम खर्च आता है |
*. हानियाँ (disadvantage) -
1. दिखावट उतनी अच्छी नहीं होती है |
2. प्रॉब्लम को ढूँढना बहुत मुश्किल होता है |
3. वोल्टेज ड्राप अधिक होता है |
4. शोर्ट सर्किट हमेशा होती रहती है |
(ख) डिस्ट्रीब्यूशन प्रणाली (Distribution System) - इस विधि में सप्लाई को मेन बोर्ड से निकालने के बाद घर के DB बॉक्स तक ले जाते हैं, और फिर वहां से घर के सभी रूम के लिए अलग अलग सर्किट वायर दिए जाते हैं, DB बॉक्स यानी की वह बॉक्स जिसमे से से सर्किट को डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है बेसिकली यहाँ पर MCB लगे होतें हैं/ इस विधि में जॉइंट की आवश्यकता नहीं पड़ती और इसमें किसी भी सर्किट को आवश्यकता अनुसार चालु या बंद किया जा सकता है जबकि बाकी सारे सर्किट काम करते रहेंगे, यह विधि आधुनिक है और अधिकतर अपनाई जाती है |
इसके लाभ और हानियाँ...!
*. लाभ (Advantage) -
1. दिखावट काफी अच्छी है |
2. दोष ढूँढना आसान है |
3. सभी पोइंटों को एक सी वोल्टेज मिलती है |
4. हर सर्किट पर अलग अलग फ्यूज या MCB लगा रहता है |
5. उड़े फ्यूज को बदलना आसान है या MCB को जल्दी चालु किया जा सकता है |
6. इस विधि से काम करना भी बहुत आसान है |
हानियाँ (Disadvantage) - इस विधि की स्थापना में तार अधिक लगती है इसलिए ये थोडा महंगा होता है |
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