चित्र: A-1
एटम के केंद्र में न्यूक्लियस होते हैं जिसमे की प्रोटोन और न्यूट्रोन होते हैं एटम में इलेक्ट्रान शैलों (shells) में व्यवस्थित (arrange) हुए होते हैं हर इलेक्ट्रान न्यूक्लियस के चारो ओर अंडाकार रिंग (Elliptical Ring) में घूमते रहते हैं, जब वे एक चक्कर काट लेते हैं तो इलेक्ट्रान कुछ दर्जे आगे होकर फिर एक चक्कर लगते हैं और फिर कुछ आगे बढ़कर तीसरा चक्कर लगते हैं और इस प्रकार वे गोला (Sphere) बनाकर चक्कर काटते रहते हैं, कुछ इलेक्ट्रान क्लॉकवाइज घूमते हैं तथा कुछ एंटी - क्लॉकवाइज जैसा की उपर चित्र: A-1 में दिखाया गया है, न्यूक्लियस के चारो ओर घूमते-घूमते वे अपने धुरी पर भी घूमते रहते हैं जैसे की सूर्य के चारो ग्रह, ये इलेक्ट्रान सदा निश्चित रस्ते पर ही घूमते हैं क्यूंकि सदा प्रोटोन के लिए खींचे रहते हैं इसमें सैन्त्रिफ्युगल फ़ोर्स भी रहता है, एक शैल के बाद दुसरे शेल्लो में चलने वाले इलेक्ट्रान में सैन्त्रिफ्युगल फ़ोर्स खिंचाव कम होता है, "देखें चित्र: A-2"
चित्र: A-2
"K" में 2 से ज्यादा नहीं
"L" में 8 से ज्यादा नहीं
"M" में 18 से ज्यादा नहीं
"N" में 32 से ज्यादा नहीं
यह आवश्यक नहीं है की पहले एक शैल पूरा हो तो बाद में दूसरा शैल पूरा होगा, ताम्बे और सिल्वर (चाँदी) की एटम की बनावट चित्र A-2 में दिखाया गया है,
इलेक्ट्रान थ्योरी के आधार पर सभी मैटर (तत्व) मूल रूप से एक होते हैं, इस प्रकार ताँबा, लोहा, एल्मुनियम आदि सभी मूल रूप से प्रोटोन, न्यूट्रोन और इलेक्ट्रोन के बने होते हैं लेकिन उनकी व्यवस्था अलग-अलग होती है जिनमे उनकी विशेषताएं बदल जाती हैं, यदि ताँबे के एटम की बनावट को देखेंगे तो ज्ञात होगा की उसमे पुरे तथा ख़ास नंबर के प्रोटोन, न्यूट्रोन और इलेक्ट्रोन ठीक प्रकार से सेट हुयें हैं, और यदि चाँदी का एटम देखेंगे तो पता लगेगा की उसमे इनकी संख्या तथा बनावट ताँबे से भिन्न है
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